Kavi Kishor Kalpanakant Slideshow: Litoo’s trip to Ratangarh (near Shekhawati), Rajasthan, India was created by TripAdvisor. See another Shekhawati slideshow. Create your own stunning slideshow with our free photo slideshow maker.
लीटू कल्पनाकांत
Sunday, December 4, 2011
Monday, November 28, 2011
ल्यो सुणो सा संत विकाशनाथ जी रो राजस्थानी भजन अचंभो!
Saturday, February 5, 2011
Thursday, January 13, 2011
Monday, January 10, 2011
लीटू कल्पनाकांत री एक राजस्थानी कविता
दीठ अदीठ
जीव जलम करमा री गत है , कुण हारे अर किण री जीत
सम्मोहन हिवडै नै पोखै , हियै हेत सूं मिलज्या मीत
अगन धरा पाणी अर आभो , सांसा वायु घाली कुण
घाण घोळ कर पांचू तत रो , इण घट रो घट काडै कुण
आँख कान नकलों अर रसना , हाथ पगां रा सस्तर सात
पांचू इनरया गत नै साधै , अगत न आवै इण रै हाथ
अगम अगोचर किण रै ओले , परतख सोच विचारे चींत
धरती तरसै बादळ बरसै, तापै सुरजी निपजै धान
चाँदड़लो इमरत बरसावे, कीं परतख कीं होवै भान
सिस्टी री गत नै कुण जाण, ऋचा मंत्र उच्चारै साम
भांत-भांत रा मेला मंडऱ्या, कामण नै रीझावै काम
जीव जीव रै कठ सगारथ , जतना जूझे जावै जीत
जीव जलम रा रिश्ता मानै, जीवण रिश्ता रो आधार
जीवंत जीव मरण कद मानै , जलम मरण पण है साधार
क्यां सारु रोवै कल्पावै, क्यां सारु है मीत'र गीत
क्यां सारु ओं घडयों खोळीयो, क्यां सारु है दीठ अदीठ
मो माया री रीत सनातन , ज्ञानी ढुं'ढ बण कर ढीट
जीव जलम करमा री गत है , कुण हारे अर किण री जीत
सम्मोहन हिवडै नै पोखै , हियै हेत सूं मिलज्या मीत
जीव जलम करमा री गत है , कुण हारे अर किण री जीत
सम्मोहन हिवडै नै पोखै , हियै हेत सूं मिलज्या मीत
अगन धरा पाणी अर आभो , सांसा वायु घाली कुण
घाण घोळ कर पांचू तत रो , इण घट रो घट काडै कुण
आँख कान नकलों अर रसना , हाथ पगां रा सस्तर सात
पांचू इनरया गत नै साधै , अगत न आवै इण रै हाथ
अगम अगोचर किण रै ओले , परतख सोच विचारे चींत
धरती तरसै बादळ बरसै, तापै सुरजी निपजै धान
चाँदड़लो इमरत बरसावे, कीं परतख कीं होवै भान
सिस्टी री गत नै कुण जाण, ऋचा मंत्र उच्चारै साम
भांत-भांत रा मेला मंडऱ्या, कामण नै रीझावै काम
जीव जीव रै कठ सगारथ , जतना जूझे जावै जीत
जीव जलम रा रिश्ता मानै, जीवण रिश्ता रो आधार
जीवंत जीव मरण कद मानै , जलम मरण पण है साधार
क्यां सारु रोवै कल्पावै, क्यां सारु है मीत'र गीत
क्यां सारु ओं घडयों खोळीयो, क्यां सारु है दीठ अदीठ
मो माया री रीत सनातन , ज्ञानी ढुं'ढ बण कर ढीट
जीव जलम करमा री गत है , कुण हारे अर किण री जीत
सम्मोहन हिवडै नै पोखै , हियै हेत सूं मिलज्या मीत
लीटू कल्पनाकांत: लिटू कल्पनाकांत : सीताराम महर्षि नै राजस्थानी री स...
लीटू कल्पनाकांत: लिटू कल्पनाकांत : सीताराम महर्षि नै राजस्थानी री स...: "रतनगढ़ रा ख्यातनाम साहित्कार कविवर सीताराम महर्षि नै इण बरस रो सीताराम रुंगटा राजस्थानी सहित पुरस्कार घोषित हुयो है इण खबर सूं रतनगढ़ समेत आ..."
लिटू कल्पनाकांत : सीताराम महर्षि नै राजस्थानी री सेवा रै स्वरूप सीताराम रुंगटा राजस्थानी सहित पुरस्कार
रतनगढ़ रा ख्यातनाम साहित्कार कविवर सीताराम महर्षि नै इण बरस रो सीताराम रुंगटा राजस्थानी सहित पुरस्कार घोषित हुयो है इण खबर सूं रतनगढ़ समेत आखे राजस्थान माई हरस री लहर है! आदरजोग महर्षि री राजस्थानी अर हिंदी माई मोकळी किताबां परकासित है अर बै राजस्थानी अर हिंदी रै सहित जगत रा उजला नखत बण'र सैंजोर दीप ऱ्या है . इण मोकै काव्ययोगी किशोर कल्पनाकांत स्मृति सहित संस्थान मायड़भासा रै इण सपूत नै बारम्बार निवण करै!
Friday, December 31, 2010
Thursday, November 4, 2010
लीटू कल्पनाकांत : दीपावली की शुभकामना
संस्कृति भाषा-धरम है आपै-तणी पिछाण
उजलै इणसू मानखो, दिवलै रै परवाण
जय बोलें
दीप जले
दीवाली आई!
अपने घट के पट खोलें !
ज्योतिर्मय सनातन संस्कृति की
आओ हम जय बोले!
आओ
हम तम तोम तोड़ दें
जीवन को उजियाला दें !
राष्ट्र भावना की पूजा को
एक सूत्र की माला दें !
मन का मोल करें मन से ही
तन को दीपों से तोलें
कितना सुन्दर
सुखकर
दीपों का यह देश निराला है
संस्कृति की ये वंदनवारें
घर आँगन उज्याला है
आओ अपने चिंतन में
हम
दीपों का दर्शन घोलें !
जलें दीप की तरह
और
आलोक-भाव में ढल जाएँ
जय की
अपनी मानवता से
उज्जवल-निर्मल कर जाएँ!
आओ
अपना सारा कल्मष
नन्हे दीपों से धोलें
ज्योतिर्मय सनातन संस्कृति की
आओ हम जय बोले
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